सूरत पर मत जाओ

एक छोटा-सा चूहा अपने बिल में से पहली बार बाहर आयाथा।

अभी तक उसने बाहर की दुनिया देखी ही नहीं थी।

उसकी माँ उसेबताती थी कि बाहर अच्छे-बुरे सब तरह के जानवर रहते हैं।

उसने छोटूचूहे को बताया था।

बिल्लियाँ कितनी ख़तरनाक होती हैं।

वह खुले मैदान में घूमने लगा।

उसे हरे-हरे पेड़ नीला आकाशछोटी-छोटी चिडियाँ सब बहुत अच्छे लग रहे थे।

तभी उसने एक बडे से जानवर को देखा।

यह जानवर बड़ा हीभयानक था।

उसके बडे-बडे पीले और भूरे रंग के पंख थे।

एकनुकीली चोंच थी और लाल रंग की कलगी थी।

उसके पंजे भी नुकौलेथे। यह एक मुर्गा था जो वहाँ रहता था।

चूहा घबराकर छिप गया।

“कितना भयानक जीव है!” उसने सोचा ‘ज़रूर यह बिल्लीहोगी।’

तभी अचानक एक बिल्ली वहाँ आई।

उसके नर्म-नर्म बाल थेसुंदर आँखें थीं और मुलायम-सी पूँछ थी।

बिल्ली की पूँछ चूहे को छतेहुए गई। चूहे को बहुत अच्छा लगा।

वह अपने घर लौट गया।

उसने अपनी माँ को बताया कि उसनेक्या-क्या देखा।

‘वह मुलायम-से बालों वाला जानवर बहुत प्यारा थामाँ।’ वह बोला।

तब उसकी माँ ने उससे कहा ‘ अरे बुद्धू वह भयानक जीव एकमुर्गा था जो तुमसे कुछ नहीं कहता ?

और वह मुलायम बालोंवाली एकबिल्ली थी-हमारी दुश्मन।

छोटू बेटा कभी भी बाहरी सूरत पर मतजाना।

बाहर से जो कुछ दिखता है वह हमेशा सच नहीं होता।’

चूहा सोच रहा था ‘हे भगवान अच्छा हुआ कि बिल्ली ने मुझेनहीं देखा।

नहीं तो मेरा क्या होता !

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