बिल्ली की छींक

एक काली बिल्ली एक दिन आटे के गोदाम में घुस गई।

वहाँपर बहुत से चूहे रहते थे।

बिल्ली ने खुश होकर सोचा-“यह जगह मेरे लिए बढ़िया है।

खूब सारा खाना मिलेगा रोज!’

उसने सोचा किछिपकर चूहों के निकलने का इंतज़ार किया जाए।

वह सुबह से रात तकइंतज़ार करती रही।

लेकिन कोई भी चूहा उसे दिखाई नहीं दिया।

दरअसल चूहे भी बहुत होशियार थे। बहुत देखभाल कर निकलते थे।

रात हो गई थी। भूख के मारे बिल्ली का बुरा हाल था।

उसनेसोचा कि अब चूहों को धोखे से ही पकड़ना पड़ेगा।

इसीलिए वह ख़ाली जगह देखकर ज़मीन पर लेट गई।

बिल्लीऐसा नाटक कर रही थी जैसे कि मर गई हो।

एक छोटे से चूहे ने उसे देखा और बोला “वह देखो एक मरीहुई बिल्ली।

‘ ऐसाकहकर वह बिल्ली कीओर दौड़ा।

लेकिन एकबुजुर्ग चुहे ने उसे रोका’रुको ऐसे उसके पासमत जाओ।

क्‍या तुम्हेंपता है कि बिल्ली कीउम्र बहुत लंबी होतीहै।

यह बिल्ली तोएकदम मोटी-ताज़ा है। ऐसे थोड़े ही मर जाएगी।’

वह बिल्ली के पास रखी हुई बोरियों के ढेर पर चढ़ गया औरसबसे ऊपर रखी आटे की बोरी को काटने लगा।

अचानक बिल्ली केऊपर ढेर सारा आटा गिरा।

बिल्ली फिर भी नहीं हिली।

लेकिन ज़्यादादेर तक वह अपने-आपको नहीं रोक पाई क्योंकि आटा उसकी नाक मेंचला .गया था।

उसे जोर से एक छींक आई और आटे के अंदर से एकसफेद बिल्ली निकली।

सारे चूहे बोले ‘भागो भागो बिल्ली आई!’

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