कुएँ का पानी

एक बार अकबर के दरबार में एक किसान व उसका पड़ोसी शिकायतलेकर पहुंचे।

किसान ने अपने पड़ोसी की तरफ इशारा करते हुए कहा “जहांपनाह मैंने इससे एक कुआँ ख़रीदा था और अब यह हमसे पानी की कीमत भी मांग रहा है।”

“यह ठीक है जहांपनाह” पड़ोसी बोला।

मैंने इसे कुआँ बेचा था न कि पानी।”

बादशाह ने बीरबल को झगड़ा सुलझाने को कहा।

बीरबल ने पड़ोसी से पूछा “तुमने कहा कि तुमने किसान को कुआँ बेचा था।”

इसलिए कुआँ तो किसान का है लेकिन तुमने अपना पानी उसके कुएँ में रखा।

क्या यह सही है ? तो इस मामले में तुम्हें पानी रखने का किराया देना होगा या फिर सारा पानी एक साथ निकालना पड़ेगा।”

पड़ोसी समझ गया कि उसकी चालाकी अब नहीं चलेगी।

उसने जल्दी से माफी मांगी और चला गया।

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