मुखौटे वाला चेहरा

एक बार अकबर अपने एक दरबारी से इतना क्रोधित हो गये कि उसे

वह व्यक्ति बीरबल के पास मदद के लिए गया।

उस दरबारी के घर पर परेशानी थी उसकी पत्नी और मां दोनों बीमार थे बीरबल ने उसकी मदद करने की सोची।

कुछ दिन बाद अकबर बहुत परेशान थे और कोई भी उन्हें खुश नहीं कर पा रहा था।

तभी दरबार में एक व्यक्ति आया जिसने एक मुखौटा पहना था जो भी उसे देखता अपने आपको हंसने से नहीं रोक पाता।

जब अकबर आये और देखा कि पूरा दरबार उस खामोशी से बाहर आ चुका तो वह और दुखी हो गये।

उन्होंने जानना चाहा कि यहां क्या होरहा है ?

मुखौटा पहने वह व्यक्ति अकबर के सामने आया तो अकबर भी हंसे बिना नहीं रह सके।

अकबर उस व्यक्ति से बोले “अपना मुखौटा हटाओ और हम तुम्हेंइनाम देंगे।”

मुखौटे वाला व्यक्ति बोला “जहांपनाह मैं इसे नहीं उतार सकता।

मैं वही दरबारी हूं जिसे आपने अपना चेहरा कभी न दिखाने की आज्ञा दी थी।

इसलिए मैं यह मुखौटा पहनकर आया हूं।”

अकबर को तुरंत समझ आ गया कि यह तरीका बीरबल का बताया हुआहै और उन्होंने दरबारी पर लगाई रोक हटा दी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Solverwp- WordPress Theme and Plugin