मरा हुआ आदमी

एक बार मुल्क का एक वरिष्ठ अफसर बुरी तरह बीमार हो गया।

तरह-तरह के हकीमों द्वारा उसकी चिकित्सा कराई गई लेकिन कोई भी उसे स्वस्थ नहीं कर सका।

वह अफसर बादशाह का बहुत मुंह लगा था।

बादशाह अपने अधिकांश आदेश उस अफसर की सलाह लेने के बाद ही जारी करता था।

बादशाह ने उस अफसर के परिवार वालों से कह दिया था कि तुम लोग रकम खर्च होने की कतई चिंता मत करना।

जहां भी और जो भी महंगे से महंगा हकीम मिले उससे अफसर का इलाज करवाना।

इसकी बीमारी का सारा खर्च सरकारी खजाने से दिया जाएगा।

लेकिन वह कहावत है न कि यदि केवल रकम खर्च करने से ही लोग ठीक हो जाया करते तो कोई भी आदमी ज्यादा दिन तक बीमारन रहता।

वही बात उस बीमार अफसर पर भी लागू होती थी।

आखिर उसके परिवार वालों ने बादशाह को खबर दी कि जो अफसर का इलाज कर सके ऐसा कोई हकीम नहीं मिला।

लिहाजा अब ऐसा लगता है कि अफसर का बचना नामुमकिन है।

यह सुनते ही बादशाह ने सोचा कि अपने इतने बड़े अफसर को देखने के लिए उसे स्वयं उसके पास जाना चाहिए।

यह सोचकर वह राजमहल से निकला और अफसर की हवेली की तरफ चल पड़ा।

रास्ते में खोजा के घर रुककर उसने खोजा को भी अपने साथ चलने को कहा।

अभी बादशाह और खोजा अफसर की हवेली से कुछ दूर थे कि तभी बादशाह ने एकाएक खोजा से कहा “खोजा!

तुम भी तो आला दर्जे के करामाती इंसान हो।

दुनिया भर के महंगे से महंगे हकीमों ने तो अफसर को ठीक करने से इंकार कर दिया क्या तुम ऐसा कोई उपचार नहीं बता सकते जिससे वह फिर से भला-चंगा हो जाए ?”

कुछ नहीं खोजा ने कहा “जहांपनाह! मैं कुछ कर सकता हूं या नहीं यह तो मरीज को देखकर ही बता सकूँगा उसे देखने से पहले कोई दवा भला कैसे करूं ?”

थोड़ी ही देर में वे दोनों बीमार अफसर की हवेली पर पहुंच गये।

वहां का आलम ही दूसरा था। हालांकि वह अफसर अभी जिंदा था लेकिन पूरी हवेली में ऐसा मातम छाया हुआ था जैसे के अफसर का देहांत हो चुका हो।

किसी को भी बादशाह के वहां आने की खुशी महसूस नहीं हो रही थी।

बीमार अफसर के पास पहुंचने के बाद बादशाह ने खोजा की तरफ आंखों में इशारे से कहा यह रहा तुम्हारा मरीज। इसे देखो और इसकी बीमारी दूर करने का कोई उपाय करो।

खोजा ने बीमार अफसर के पास पहुंचकर उसकी नाड़ी टटोली फिर उसके दिल पर हाथ रखा। जब इतने से उसकी समझ में आया तब अपना कान उसके दिल वाली जगह पर रखा।

कुछ देर दिल की धड़कन सुनने के बाद वह बोला “बादशाह सलामत! मैं किसी जिंदा आदमी का इलाज तो कर सकता हूं किसी मुर्दे का नहीं।”

खोजा की यह बात सुनकर बादशाह हैरत में पड़ गया। अफसर के घर वालों की भी हैरानी की कोई सीमा नहीं रही।

बादशाह ने खोजा को डांटा “खोजा! यह क्या बक रहे हो ? अभी अफसर जिंदा है और तुम उसे जीते जी मुर्दा ऐलान कर रहे हो। यह बद्तमीजी तो है ही इंसानियत भी नहीं है।”

खोजा ने कहा “गुस्ताखी माफ हो बादशाह सलामत! आप लोगों को जो जिंदा दिखाई दे रहा है वह इस अफसर का जिस्म है लेकिन इसका दिल अभी नहीं जाने कब का मर चुका है।

लगता है यह जनता पर इतने जुल्म अब तक करता रहा वह इसीलिए कि इसका दिल कब का मर चुका था।

अब यह जिस्म से भी इतना कमजोर हो गया है कि इसके ठीक होने के कोई आसार नहीं हैं। आदमी जब बीमार होता है

तब दवाओं और दुआओं से उतना तंदुरुस्त नहीं होता जितना अपने दिल को मजबूत करने से होता है।

चूंकि इसका दिल तो गरीबों पर जुल्म ढाते-ढाते मर चुका है इसीलिए कोई हकीम इसे अब तक ठीक नहीं कर सका और न मैं ठीक कर सकूँगा।

अब तो इसे चैन से मरने दीजिए वही इसके लिए और आम जनता के लिए फायदेमंद रहेगा।” खोजा की दो टूक बातें सुनकर बादशाह को इस बारे में कुछ

उसने घर के लोगों को गम सहने की नसीहत दी और खोजा को अपने साथ लेकर महल की ओर चल पड़ा।

लगभग आधे रास्ते तक खोजा और बादशाह में कोई बातचीत नहीं हुई। बाद में उदासी भरे स्वर में बादशाह ने खोजा से पूछा “खोजा!

क्या तुम जानते हो कि यदि मुझे जन्नत में जाना हो तो क्या करना होगा ?”

खोजा ने कहा “आपको रात-दिन सोना पड़ेगा।

तब तक जब तक आपका आखिरी वक्त नहीं आ जाता” बादशाह ने हैरान होकर अगला सवाल किया “क्या दिन-रात सोने से जन्नत नसीब हो जाती है ?”

खोजा ने बताया “सबको तो नहीं पर आपको नसीब हो सकती है।

दरअसल जब तक आप जागते रहेंगे तो फिर किसी अफसर के बहकावे में जनता पर जुल्म ढाएंगे।

जब सोते रहेंगे तो किसी की बद्दुआ कमाने की नौबत ही नहीं आएगी।

ऐसे में हो सकता है कि आपको मरने के बाद जन्नत नसीब हो जाए।

पक्के तौर पर मैं यह दावा हरगिज नहीं कर सकता क्योंकि अभी तक जिस बीमार अफसर को हम और आप देखकर आ रहे हैं ऐसे न जाने कितने अफसरों के कहने में आकर आप जनता का जीना दूभर करते रहे हैं।

आखिर उनका नतीजा भी तो आपके खाते में दर्ज हो चुका होगा।’

खोजा की खरी-खरी बातें सुन बादशाह का दिल और दिमाग सुन्न हो गए।

फिर उसने पूरे रास्ते खोजा से कोई बात नहीं की।

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