बीमार दरांंती

शेख चिल्ली की मां गांव के रईस घरों में इधर -उधर के कामकरके अपनी आजीविका चलाती थी।

“बेटा शेख” उन्होंने एक दिन सुबह को कहा “देखो में फातिमाबीबी के घर उनकी लड़की की शादी की तैयारी में मदद के लिए जारही हूं।

मैं अब रात को ही वापिस लौटूंगी।

हों सकता हैं कि मैं शायदअपने लाडले को लिए कुछ मिठाई वगैरा भी साथ में लाऊं।

फातिमाबीबी काफी दरियादिल औरत हैं।”

बेटा तुम दरांती लेकर जंगल में जाना और वहां से पड़ोसी कीगाय क॑ लिए जितनी हों सके उतनी घास काट कर लाना।

इंशाअल्लाहआज हम दोनों मिलकर काफी कमाई कर सकते हैं। देखों अपना वक्‍तबरबाद मत करना और न हीं दिन में सपने देंखना।

तुमने अगरसावधानी से काम नहीं किया तो तुम्हें दरांती से चोट भी लग सकतीहैं।

“ आप मेरे बारे में बिल्कुल भी फिक्र न करें अम्मीजान शेख नेउन्हें आश्वस्त करते हुए कहा। और फिर वो खुशी-खुशी जंगल को ओरचला।

वो रास्ते में उन मिटाइयों के बारे में सोचता रहा जो उसको अम्मी,फातिमा बीबों के घर से लाएंगी। क्या वो नर्म, भूरे, चाशनी में डूबेगुलाब जामुन होंगे, जो उसने एक बार पहले कभी खाए थे ?

उनकास्वाद उसे बार-बार याद आ रहा था।

बंद करो यह बकवास!” उसने खुद को झिड़कते हुए कहा।“अम्मी ने कहा था न कि दिन में सपने नहीं देखना।”

वो जंगल में पहुंचनें के बाद काफी लगन से काम में लग गया।दोपहर के खाने के समय तक उसने काफी सारी घास काट डाली थी।उसने उसका एक बड़ा बंडल बनाया और उसे घर ले आया।

पड़ोसीके घर घास छोड़ने के बाद और कुछ आने कमाने के बाद वो घर लौटाऔर उसने चटनी के साथ मोटी रोटी खायी। तब उसे याद आया कि वोअपनी दरांती को तो जंगल में ही भूल आया था। वो दौड़कर वापिसजंगल गया। दरांती वहाँ पड़ी थी जहां उसने उसे छोड़ा था।

तपती धूपमें दरांती का ब्लेड एकदम गर्म हों गया था और शेख ने जब उस गर्मलोहे को छुआ तो उसे एक झटका सा लगा। उसकी दरांती को आखिरक्या हुआ? वो अपनी दरांतीं का मुआयना कर रहा था तभी पड़ोस कालल्लन उस रास्ते से गुजरा।

“मियां, तुम किसे इतनी गौर से देख रहे हों ?”

उसने पूछाअपनी दरांती को। उसे कुछ हो गया है। वो काफी गर्म हैं !

“हाय राम! उसे बुखार हो गया है!” लल्लन ने शेख की नासमझीपर हंसते हुए कहा। “तुम उसे किसी हकीम के पास ले जाओ।

पर जरारूकों। मुझे मालूम है कि तेज बुखार में हकीमजी क्‍या दवाई देते हैं।आओ मेरें साथ चलो।”

दरांती के लकड़ी के हैंडल को सावधानी से पकड़कर लल्लनशेख को एक कुँए के पास ले गया।

वहां उसने दरांती को एक लंबीरस्सी से बांधा और फिर उसे कए के ठंडे पानी में लटकाया।

“अब तुम इसे इसी हालत में छोड़कर घर चले जाओ उसनेशेख से कहा। “अब तुम रात होने से पहले आना।

तब तक दंसंती काबुखार उत्तर गया होगा। अरे बेवकूफ! उतनी देर में मैं दरांतों को भीवहां से गायब कर दूंगा लललन ने चुपचाप कहा।

मैं उसे छिपा दूंगा याफिर बेच दुंगा और फिर शेख की मां दरांती खोने के लिए उसकी खूबमरम्मत करेगी!

“यकीन करो मियां” उसने जोर से कहा। “बुखार का यहीं सबसे

अच्छा इलाज है!”

शेख चिल्ली ने उसकी बात पर विश्वास किया और घर वापिस चला गया। फिर वो सो गया और जब उसकी नींद खुली उस समयसूरज ढल रहा था।

“मैं अम्मी के घर आने से पहले ही दरांती ले आताहूं” उसने सोचा। “अब तक उसका बुखार उतर गया होगा।”

फिर वो कुएं की तरफ चला। लल्लन के घर के सामने से गुजरतेसमय उसे अंदर से किसी के कराहने की आवाज आई। शेख अंदरगया।

लल्लन कौ दादी आंगन में एक खाट पर पड़ी इधर-उधर करवटेंबदल रहीं थी। शेख जब उनके पास पहुंचा तो एकदम डर गया। उनकाशरीर बहुत गर्म था।

उन्हें तेज बुखार था और शेख के अलाबा उनकीमदद करने बाला और कोई न था। परंतु अब लल्लन की दया से शेख को तेज बुखार का सही इलाज पता था।

शेख ने बूढ़ी औरत को सावधानी से अपने कंधे पर उठाया औरफिर वो कुएं को ओर बढ़ने लगा।

“मियां तुम लल्लन की दादी को कहां लिए जा रहे हो ?”

एकपड़ोसी ने पुछा।

“इलाज के लिए शेख ने जवाब दिया। “उन्हें बहुत तेज बुखार है।

उस समय लल्लन और उसके पिता बुंढ़ीं दादी के लिए दवाईलेने हकीम के पास गए हुए थे। जब वो घर वापिस पहुंचे तब उन्होंनेबूढ़ी दादी को नदारद पाया !

जब वो बूढ़ी दादी को तलाशते हुएइधर-उधर भटक रहे थे तब उन्हें वही पड़ोसी मिला जिसने शेखरचिल्ली से पूछा था।

लल्लन को जब पूरी बात समझ आई तो उसके होश उड़ गए! वोदौड़ता हुआ कुएं के पास गया और उसके पीछे-पीछे उसके पिता भीहो लिए।

लललन को दरांती चुराने का वक्‍त ही नहीं मिला था। शेख नेतभी अपनी दरांती को कुएं में से निकाला था और वो बूढी औरत कोरस्सी से बांधने की तैयारी कर रहां था।

बस उसी समय लल्लन औरउसके पिता वहां पहुंचे।

अरे पागल तुम यह क्‍या कर रहे हो ? लल्लन के पिता नेचिल्लाते हुए कहा।

फिर उन्होंने शेख को एक त़्रफ घकेला और अपनीबेहोश मां की रस्सियां खोलने लगे।

“चाचा उन्हें बहुत तेज बुखार हैं।” शेख ने काफी उत्तेजित होकरकहा। “उन्हें रस्सी से बांधकर कुएं में लटका दीजिए।

बुखार का यहीसबसे अच्छा इलाज है। लल्लन ने ही तो मुझे बताया है।”

लल्लन के पिता अपने लड़के की ओर चौते की तरह झपटे।

“तुमने यह क्‍या नई ख़ुराफात की हैं ?”

वो चिल्लाए। हरामखोर!मैं तुझे बाद में सबक सिखाऊंगा ! अगर तुम्हें अपनी जान प्यारी है तोफौरन अपनी दादी को घर पहुंचाने ओर हकीम को लाने में मेरी मददकरो ! ”

लल्लन की दादी कुछ दिनों में ठीक हो गयीं पर लल्लन को उसके पिता ने जमकर पिटाई लगाई।

शेख की अम्मी ने जब यह पूरीघटना सुनी तो उन्हें यह समझ में ही नहीं आया कि वो हंसें या रोयें!वो शेख के लिए जो स्वादिष्ट गुलाव जामुन लायीं थीं उनको उसने मजाले-लेकर खाया।

बाद में अम्मी ने शेख को समझाया कि दरांती क्यों गर्महुई थी और क्यों किसी चीज को कुएं में डालना उसका बुखार उतारनेका सबसे अच्छा तरीका नहीं था!

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