कम बोलो

एक छोटी-सी बच्ची थी – आँचल। आँचल बहुत प्यारी थी।

उसे चित्र बनाना बहुत अच्छा लगता था। सभी उसकी चित्रकला की प्रशंसा करते थे।

पढ़ने में भी वह बहुत तेज थी। अपने सभी काम खुद करती थी।

यहाँ तक कि रोज जब माँ दूध का गिलास उसे देती थी तो वह गट-गट पी जाती थी।

खूब सब्जियाँ खाती थी और माँ का कहना मानती थी। लेकिन वह बोलती बहुत थी और उसकी इस बात से माँ अक्सर परेशान हो जाती थी।

एक बार माँ ने उससे कहा कि आँचल ‘म’ अक्षर से शुरू होने वाले तीन शब्द लिखो और उनके चित्र बनाओ। आँचल ने तीन शब्द लिखे –

‘म’ से मेढक

‘म’ से मुर्गा

‘म’ से माँ

वह माँ के पास आई और उन्हें चित्र दिखाए। माँ ने उससे पूछा

आँचल बेटा तुम्हें इस तीनों में से सबसे अच्छा कौन लगता है ?

‘माँ।’ आँचल बोली।

माँ मुस्कुराईं और बोली उसके बाद।

उसके बाद मुर्गा और फिर मेढक। आँचल बोली।

अच्छा अब ये बताओ कि ऐसा क्यों है ?माँ ने आगे पूछा।

आँचल ने उत्तर दिया वह इसलिए की सभी की सबसे प्यारी होती है क्योंकि वह बहुत प्यार करती है बिलकुल आपकी तरह।

फिर मुर्गा क्योंकि वह सुबह-सुबह बाँग देकर सबको जगाती है।

और मेढक तो बिलकुल पसंद नहीं है मुझे क्योंकि वह दिन-रात बस टर्र-टर्र करता रहता है।

ओफ्फोह! कितनी आवाज करता है !

माँ ने आँचल से कहाँ बेटा मैं यही तुम्हें समझाना चाहती हूँ।

देखो मुर्गा बीएस सुबह सही समय पर बोलता है इसलिए सब उसकी आवाज ध्यान से सुनते हैं और जाग जाते हैं।

लेकिन मेढक हमेशा टर्र-टर्र करता रहता है इसलिए सब उससे ऊब जाते है।

कोई उसकी बात नहीं सुनता न ही कोई उसे पसंद करता है।

इसलिए बस उतना ही बोलना चाहिए जितना जरूरी हो। समझी!

आँचल समझ गई कि माँ उससे क्या कहना चाहती हैं।

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