अन्धी का बेटा

एक औरत थी जो अंधी थी जिसके कारण उसके बेटे को स्कूल में बच्चे चिढाते थे की अंधी का बेटा आ गया।

हर बात पर उसे ये शब्द सुनने को मिलता था कि “अन्धी का बेटा” इसलिए वो अपनी माँ से चिडता था ❗

उसे कही भी अपने साथ लेकर जाने मेंहिचकता था उसे नापसंद करता था।

उसकी माँ ने उसे पढ़ाया और उसे इस लायक बना दिया की वो अपने पैरो परखड़ा हो सके लेकिन जब वो बड़ा आदमी बन गया तो अपनी माँ कोछोड़ अलग रहने लगा।

एक दिन एक बूढी औरत उसके घर आई और गार्ड से बोलीमुझे तुम्हारे साहब से मिलना है जब गार्ड ने अपने मालिक सेबोल तो मालिक ने कहा कि बोल दो मै अभी घर पर नही हूँ।

गार्ड ने जब बुढिया से बोला कि वो अभी नही है। तो वो वहा से चली गयी।

थोड़ी देर बाद जब लड़का अपनी कार सेऑफिस के लिए जा रहा होता है।

तो देखता है कि सामने बहुत भीड़ लगी है।

और जानने के लिए कि वहाँ क्यों भीड़ लगी है वहवहा गया तो देखा उसकीमाँ वहा मरी पड़ी थी।

उसने देखा की उसकी मुट्ठी मेंकुछ है।

उसने जब मुट्ठी खोली तो देखा की एक लेटर जिसमें यहलिखा था कि बेटा जब तू छोटा था तो खेलते वक़्ततेरी आँख में सरिया धंस गयी थी और तू अँधा हो गया था तो मैंनेतुम्हे अपनी आँखे दे दी थी।

इतना पढ़ कर लड़का जोर-जोर से रोने लगा।

उसकी माँ उसके पास नही आ सकती थी। दोस्तों वक़्त रहते ही लोगो की वैल्यूकरना सीखो।

माँ-बाप का कर्ज हमकभी नही चूका सकते ।

हमारी प्यास का अंदाज़भी अलग हैदोस्तोंकभी समंदर को ठुकरा देतेहै तो कभी आंसू तक पी जातेहै।

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