ब्राह्मण और कोबरा

एक बार एक ब्राह्मण अपने खेत में काम कर रहा था। तभी उसे एक बड़ा कोबरा सांप दिखाई दिया।

वह दूध से भरा एक बर्तन लाया और उसने सांप की बाँबी के पास रख दिया। अगले दिन उसे उस बर्तन में सोने का सिक्का मिला। अब यही हर दिन होने लगा।

ब्राह्मण हर दिन सोने के सिक्के पाने लगे। एक दिन उसने अपने बेटे को कोबरा के लिए दूध रख जाने को कहा।

उसके बेटे ने ऐसा ही किया। जब वह सोने का सिक्का उठा रहा था उसके मन मन में लालच आ गया। उसने सोचा कि कोबरा को मारकर सोने के सारे सिक्के एक साथ निकाल लिए जाएँ।

उसने कोबरे के ऊपर एक लाठी मार दी। कोबरा दूसरी ओर खिसककर अपने को बचा ले गया लेकिन उसने क्रोध में आकर ब्राह्मण के बेटे को डँस लिया और उसकी मौत हो गई।

अगले दिन ब्रह्मण ने फिर से कोबरा के लिए दूध रखा लेकिन सांप ने उसे नहीं पिया। ब्राह्मण समझ गया कि विश्वास टूट जाए तो उसे फिर से नहीं पाया जा सकता।

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