राजा की जिद

एक थे राजा मानसिंह।

एक बार वे राज्य में वेष बदलकर घूम रहेथे।

एक जगह उन्होंने बड़ी भीड़ लगी हुई देखी।

उत्सुकतावश वे वहाँजाकर देखने लगे।

उन्होंने देखा कि एक मदारी अपने बंदर का खेल दिखारहा था।

मदारी का बंदर इतना समझदार था कि वही सब कर रहा था जोउससे कहा जा रहा था।

साथ ही उसमें और भी बहुत-सी खूबियाँ थीं।

वहढोलक बजाता था नाचता था और सबका मन बहलाता था।

राजा को वह बंदर बहुत पसंद आया।

तमाशा ख़त्म होने के बादवे मदारी के पास आए और बोले ‘हमें यह बंदर बहुत पसंद है।

तुमइसको हमें बेच दो।’

मदारी ने कहा ‘नहीं भाई इस बंदर से ही तो मैं रोटी कमाताहूँ।

अगर यह ही नहीं रहेगा तो मैं क्या करूँगा ?

इसे मैं नहीं बेच सकता।’

लेकिन राजा मानसिंह ज़िद पर अड॒ गए।

उन्होंने मदारी से कहाकि वे उसे बंदर के बदले में बहुत से पैसे देंगे। उससे वह एक और बंदर

मदारी बंदर को बेचना नहीं चाहता था लेकिन राजा ने ज़बरदस्तीबंदर को खरीद लिया।

मदारी बेचारा क्या करता। राजा को वह पहचानतो पाया नहीं था। चुपचाप अपने घर चला गया।

बंदर को लेकर राजा महल में वापिस आ गए।

उन्होंने अपनेसेवकों से कहा कि यह बंदर उनका खास सेवक है।

वे उसे हर वक्‍तअपने साथ रखेंगे।

सोते समय भी वे बंदर से कहते थे कि वह उनकेसिरहाने पर बैठा रहे।

एक दिन राजा सो रहे थे।

बंदर सिरहाने बैठा हुआ था।

तभी एकमक्खी कहीं से उड़ती हुई आई और राजा के आस-पास मँडराने लगी।

बंदर बार-बार मक्खी को उड़ाता था और मक्खी फिर से वहीं आ जातीथी।

बार-बार उड़ाने पर भी जब वह वापिस आती रही तो बंदर को गुस्साआ गया।

उसने तय किया कि इस बार मक्खी बेैठेगी तो वह उसे मार देगा।

तभी मक्खी जाकर राजा की नाक पर बैठ गई।

बंदर ने देखा किपास ही में राजा की तलवार रखी हुई है।

उसने तलवार उठाई ओरमक्खी पर वार करने के लिए हाथ ऊपर किए।

उसे इतनी समझ थोड़ेही न थी कि मक्खी के साथ-साथ राजा को भी चोट लगेगी।

वह पूरी ताकृत से वार करने ही वाला था तभी मक्खी राजा कीनाक में अंदर जाने लगी और राजा को ज़ोर से छींक आ गई।

वे उठकरबैठ गए।

उन्होंने देखा कि बंदर के हाथ में उनकी तलवार थी।

बंदरतलवार लेकर मक्खी के पीछे-पीछे दौड़ने लगा।

राजा के सैनिकों नेबडी मुश्किल से उसे पकड़ा।

अब राजा की समझ में आया कि जानवर आखिर जानवर हीहोता है।

उन्होंने सैनिकों को आदेश दिया कि बंदर के मालिक को दूँढ़करउसे यह बंदर लोटा दिया जाए।

मदारी अपने बंदर के वापिस मिल जाने से बहुत खुश था।

राजासोच रहे थे ‘सच बात यही है कि जिसका काम उसी को साजे।’

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Solverwp- WordPress Theme and Plugin