पूस की रात

हल्कू एक गरीब छोटा किसान ! खेती से उसे कुछ नसीब नहींहोता । उसकी पत्नी मुन्नी कई बार कह चुकी है- में कहती हूँ तुमक्यों नहीं खेती छोड़ देते ? मर-मर कर काम करो उपज हो तो बाकीमें दे दो बस चलो छुट्टी हुई ! बाकी चुकाने के लिए ही तो हमाराजनम हुआ है ।”…

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प्रेरणा

मेरी कक्षा में सूर्यप्रकाश एक बहुत शरारती और ऊधमी विद्यार्थीथा । सब विद्यार्थी उससे डरते थे । यही नहीं हम अध्यापकों को भीउससे आशंका और डर हर समय बना रहता था न-जाने कब क्याशरारत कर डाले । टीचर की टेबल की दराज में मेंढक रख देनाहड़ताल करा देना आदि तो उसके लिए खेल था ।…

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परीक्षा

दिल्‍ली में लूट-मार कत्ल-गारत मचाने के बाद नादिरशाह ने शाहीमहल में आकर हुक्म दिया-“ महल की सब बेगमों को सुसज्जितकरके मेरे हुजूर में नाचने के लिए उपस्थित करो ! ” हुक्म की देर थीतभी सब बेगमें बेबस-मज़बूर मायूस मन मारे सज-धजकर आउपस्थित हुईं । नादिरशाह ने अपनी कटार-तलवार उतार कर वहां रखदी और आप आराम…

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पंच परमेश्वर

जुम्मन शेख और अलगू चौधरी बचपन के मित्र थे । दोनों कोएक-दूसरे पर पूरा विश्वास था । दोनों साझे की खेती करते औरउनका लेन-देन भी साझे का ही था | एक बूढ़ी खाला !(मौसी) थी । जिसे बहला-फुसला कर सारी जमीन अपनेनाम लिखवा ली औरउसे रोटियों के लिएमुहताज बना दिया । कुछ दिन तो खालाने…

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नमक का दारोगा

मुंशी वंशीधर बड़े भाग्यशाली रहे कि उन्हें जाते ही नमक विभाग मेंदारोगा की नौकरी मिल गई ! उनके पिता की चिर अभिलाषा पूरीहुई । पिता ने कहा था-‘ बेटा मासिक वेतन तो पूर्णमासी का चाँदहै जो घटते-घटते लुप्त हो जाता है । ऊपरी आय बहता हुआ स्रोतहै जिससे सदैव प्यास बुझती है । ‘ पिता…

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मर्यादा की वेदी लक

चित्तौड़ का रणछोड़जी का मंदिर ! परम भक्त मीराबाई से मंदिर मेंही झालावाड के रावसाहब और उनकी अनिंद्य सुंदरी कन्या प्रभा कीभेंट हुई । वहीं मंदार के राजकुमार और प्रभा की आँखें चार हुईं; दोनोंप्रथम साक्षात्कार में ही प्रेम-बाण से बिंध गए ! प्रभा के पितारावसाहब पहले से ही मंदारकुमार के रूप-गुण पर मुग्ध थे…

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मैकू

शहर के ताड़ीखाने पर कांग्रेस के स्वयंसेवकों ने धरना जमा रखा है। वे किसी को शराब पीने के लिए ताड़ीखाने में जाने नहीं देरहे । ताड़ीखाने पर पियक्क्ड़ों की भीड़ जमा हो गई क्योंकि ठेकेदारने आज मुफ्त पिलाने की घोषणा कर डाली थी | कांग्रेसी सबसे हाथजोड़कर विनय-प्रार्थवा कर अंदर जाने से रोक रहे थे…

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होली का उपहार ली

अमरकांत शादी के बाद पहली बार होली के अवसर पर ससुरालजाने की तैयारी करता है । अपने मित्र मैकूलाल के सुझाव पर वह’एक पारसी महिला की सुंदर साड़ी देखकर वैसी ही सुंदर साड़ी पत्नीके लिए उपहार ले जाना चाहता है । साड़ी विलायती थी और केवलहाशिम की दूकान पर मिल सकती थी । अंग्रेजी हुकूमत…

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खून सफेद

जादोराय गाँव का किसान है । बरखा हुई नहीं बेचारे दाने-दाने कोतरसते हैं । बच्चा साधो भूखा-नंगा सोता है पत्नी देवकी पानी केदो घूँट पीकर ही रह जाती है । किसानों ने बहुतेरे जपतप किए ईंट-पत्थर देवी-देवताओं के नाम से पुजाए बलिदान किए पानी कीअभिलाषा में रक्त के पनाले बह गए लेकिन इन्द्रदेव किसी तरह…

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गुप्तघन

बाबू हरिदास ईंटों के पजावे का मालिक है । बहुत-से मजदूर उसकेपजावे पर ईंटें ढोते हैं और हरिदास एक ईंट ढोने की मजूरी एक कौड़ीदेता है । कई दिन से एक बालक मगनसिंह वहाँ लगन से मजूरी करताहै । हरिदास को उसकी हालत पर दया आई । एक बार जब वह तीनदिन गैर-हाजिर रहा तो…

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