Bhagat Singh Biography In Hindi

भगत सिंह का जन्म 27 सितंबर 1907 को लायलपुर ज़िले के बंगा (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था। भगत का जन्म सिख परिवार में हुआ था । इनके जन्म के समय उनके पिता और घर के कुछ सदस्य जेल में थे। उन्हें वर्ष 1906 में ब्रिटिश सरकार द्वारा जबरन लागू किये हुए औपनिवेशीकरण विधेयक के खिलाफ…

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ठाकुर का कुआं

जोखू ने लोटा मुँह से लगाया तो पानी से सख्त बदबू आयी । वह गंगीसे बोला- यह कैसा पानी है ? मारे बास के पिया नहीं जाता । गलासूखा जा रहा है और तू सड़ा पानी पिलाये देती है ! गंगी प्रतिदिन शाम को पानी भर लाया करती थी । कुआं दूरथा; बार-बार जाना मुश्किल…

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सदूगति

दुखी चमार को पंडित से लड़की की सगाई का मुहूर्त निकलवाना हैवह पंडित घासीराम को बुलाने गया । नजराने के लिए घास के सिवादेने को उसके पास क्या था ? खाली हाथ आया देखकर तो पंडितजी दूर से ही भगा देंगे इसीसे घास का एक गट्ठा ले गया । छापा-तिलकधारी नेमी-धर्मी पंडित ने उसे ठहरने…

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सवा सेर गेहूँ

शंकर एक गरीब कुरमी किसान था । उसे अपनी खेती से दो जूनखाना भी नसीब नहीं होता था पर उसका धर्म-भीरू मनसाधु-महात्माओं को अपने द्वार से खाली और भूखा नहीं जानेदेता था । एक रोज एक बड़े महात्मा उसके घर भोजन करनेआए । घर में थोड़े-से जौ ही थे और सिद्ध महात्मा को जौ कीरोटी…

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सुजान भगत

सीधे-सादे किसान धन हाथ आते ही धर्म और कीर्ति की ओर झुकतेहैं दिव्य समाज भोग-विलास की ओर । सुजान महतो की फसलअच्छी हुई धन पाकर उदार और धार्मिक बन बैठा । अब उसकीचौपाल पर बड़े-बड़े हाकिम दारोगा अफसर आकर ठहरते हैं वहगर्व से फूला नहीं समाता । अब लोग उसे ‘ मेहतो ‘ ‘ मेहतो…

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सती

बुंदेलखंड की पहाड़ी पर सती चिंतादेवी का मंदिर है । दो शताब्दियोंसे मंगलवार के दिन हजारों स्त्री-पुरुष यहाँ मेला लगाते हैं । सती कीपूजा करते हैं । कालपी की इस वीर सती की बड़ी दारुण कहानी है । वहकेवल तेरह साल की बालिका थी जब उसके माँ-बाप उसे बीहड़पहाड़ियों में अकेला छोड़ गए थे ।…

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शतरंज के खिलाड़ी

वाजिंद अली शाह का जमाना था । लखनऊ विलासिता के रंग मेंडूबा हुआ था । राज-कर्मचारी विषय-वासना में कविगण प्रेम औरविरह-वर्णन में कारीगर कलाबत्तू और चिकन बनाने में व्यावसायीसुरमे इत्र मिस्सी और उबटन का रोजगार करने में लिप्त थे । संसारमें क्या हो रहा है इसकी किसी को खबर न थी । बटेर लड़ रहेहैं…

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रानी सारंधा

“ सैया तुमने कुल की मर्यादा खो दी । ऐसा कभी न हुआ था ! ” युद्धमें शत्रु को पीठ दिखाकर घर भाग आए बुंदेला वीर अनिरुद्धसिंहबहन सारंधा की यह फटकार सुनकर तिलमिला उठे ! उल्टे पाँव लौटपड़ें । अआर्से से पति-वियोग में व्याकुल शीतलादेवी को ननद की यहघिक्कार बुरी लगी नागिन की तरह बल…

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भानु चौधरी गाँव के मुखिया हैं । उनके तीन बेटे हैं । बड़ा बितानकानूनदां है अपना अच्छा जुगाड़ बना लेता है । मंझला शान खेती-बाड़ीसे घर का खर्चा निकाल लेता है पर तीसरा गुमान बांका-छैला बनाफिरता है पर कमाई-धमाई कुछ नहीं करता ! पिता से सैंकड़ों रुपयेलेकर उसने कपड़े की दूकान की पर कपड़ा बेचना…

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राजा हरदौल

ओरछा के बुंदेला राजा जुझारसिंह की वीरता और योग्यता से प्रसन्नहोकर मुगल बादशाह शाहजहाँ ने उसे दक्खिन का शासक बनाकरभेज दिया । जुझारसिंह ने ओरछा राज्य की बागडोर अपने छोटे भाईहरदौलसिंह को सौंपी और दक्खिन में अपनी विजय का डंका बजानेचला गया । हरदौल ने अपनी वीरता साहस और योग्यता से अपनीबुंदेला जाति और ओरछा…

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