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घर-जमाई

हरिधन की माता का देहान्त हुए आज दस साल हो गए । वह सोलहसाल का था और उसका विवाह हो चुका था । पर माँ की स्नेह-छायाके न रहने से वह जैसे निस्सहाय हो गया । नई माँ के आने से एककाली घटा-सी एक अंधकार का परदा-सा उसके जीवन पर पड़गया । वह एक दिन…

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गुप्तघन

बाबू हरिदास ईंटों के पजावे का मालिक है । बहुत-से मजदूर उसकेपजावे पर ईंटें ढोते हैं और हरिदास एक ईंट ढोने की मजूरी एक कौड़ीदेता है । कई दिन से एक बालक मगनसिंह वहाँ लगन से मजूरी करताहै । हरिदास को उसकी हालत पर दया आई । एक बार जब वह तीनदिन गैर-हाजिर रहा तो…

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गरीब की हाय ली

मुंशी रामसेवक चांदपुर गाँव के रईस हैं । वह कानूनदाँ हैं औरमुंसिफी कचहरी में मुख्तार बने अपने ढेरों असामियों को ठगते रहतेहैं । गरीब और बेबस लोगों पर वह मीठी छुरी चलाते हैं । अनेकोंनिरीह विधवाओं और बूढ़े-ठेरों ने विश्वास और श्रद्धा से भरकरउनके पास अपनी पूँजी अमानत रखी । पर मुंशी रामसेवक ने बड़ीसफाई…

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फातिहा

मैं एक अनाथ ! सरकारी अनाथालय में पला किन्तु बलूची सरहदीकबीले का छह फुट नौ इंच का लंबा-चौड़ा बलिष्ठ जवान ! सीधाफौज में भर्ती हो गया । मेजर सरदार हिम्मतसिंह की मुझ परकृपा-दृष्टि थी । एक रोज मैंने दूर से देखा एक अफ्रीदी बूढ़े ने एकजवान की छाती में छुरा घोंप कर उसकी बंदूक छीन…

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ईदगाह

रमजान के पूरे तीस दिन बाद ईद आई है । गाँव में कितनी हलचलहै ईदगाह जाने की तैयारियाँ हो रही हैं । सभी प्रसन्न हैं । सबसे ज्यादाप्रसन्न हामिद है । वह चार-पाँच साल का गरीबसूरत दुबला-पतलालड़का जिसका बाप गत वर्ष हैजे की भेंट हो गया और माँ न जानेक्यों पीली होती-होती एक दिन मर…

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दो बैलों की कथा

झूरी काछी के दो प्यारे-प्यारे बैल थे – हीरा और मोती । दोनों में बड़ाप्यार था । एक-दूसरे को चाट-सुँघ कर प्यार जताते थे । झूरी को बैलोंसे और बैलों को भी झूरी से बहुत लगाव हो गया था । एक बार झूरीने जोड़ी को ससुराल भेज दिया। झूरी का साला गया उन्हें अपने घरले…

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दारोगाजी

मैं किसी काम से तांगे पर सवार चौक तक जा रहा था कि रास्ते मेंएक दारोगाजी भी तांगे पर आ सवार हुए । तांगा थोड़ा आगेबढ़ा ही था कि सामने एक आदमी को देखकर दारोगा ने उसे सलामकी। सलाम का जवाब न देकर उस आदमी ने दारोगा को देखते हीगालियों की बौछार के साथ-साथ उस…

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दो बहनें

दो बहनें -रूपकुमारी और रामदुलारी एक विवाहोत्सव में मिलीं । बड़ी बहन रूपकुमारी छोटी बहन रामदुलारी को बढ़िया जेवरों सेलदी कीमती साड़ी मखमल के ब्लाउज और ठाठ-बाट में देखकरदंग रह गई ! दो साल पहले जब रामदुलारी का विवाह हुआ तब तोउसके पास कुछ न था ससुराल का घर भी साधारण था और पतिअभी पढ़ता…

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दो भाई

केदार और माधव दो भाई हैं – बचपन से दोनों माँ की आँखों के तारेइकट्ठे खेले-पले बड़े हुए । विवाह हुआ दोनों की बहुएँ आई बड़ीचम्पा छोटी श्यामा । बहुओं के आने पर परिवार बढ़ा तो सनमुदाद वैमनस्य इर्ष्या-द्वेष भी बढ़ चला । माँ दोनों के झगड़े देख दुखी थी। सम्मिलित परिवार टूट गया मकान…

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बैर का अंत

बड़े भाई सिद्धेश्वर राय की मृत्यु पर रामेश्वरराय और विश्वेश्वरराय उनके क्रियाकर्म के खर्च के लिए सांझे की जमीन रहन रख तीनसौ रुपये कर्ज लेते हैं । रामेश्वरराय की हालत बहुत पतली बनीरही । वह जमीन छुड़ाने में असमर्थ था। विश्वेश्वराय ने अपनेपास से तीन सौ रुपये देकर जमीन रहन से छुड़ा ली और बडेभाई…

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